शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

-: ये भूल थी मेरी कुछ या भूल ही किया है :-

हमदर्द मेरा होके, तूँ दर्द क्यूँ दिया है,
ये भूल थी मेरी कुछ, या भूल ही किया है।

साथ हम जिएंगे, अब साथ ही मरेंगे,
ये आरजू तेरी थी, या थी कोई बनावट,
कलाइयों में मेहँदी, वो नाम की लिखावट,
ये प्रेम की कला है, या झूट की सजावट,
दिया था हमने कंगन, क्यूँ हाथ में लिया है।
ये भूल थी मेरी कुछ, या भूल ही किया है।

है नाम तेरा दिल में, बदनाम क्यूँ महफ़िल में,
ये कैसे मैं दिखाऊँ, हूँ मैं ही तेरे दिल में,
सुबूत मैं क्या लाऊँ, एक था मेरा तूँ अपना,
अब ठहरी जिन्दगी है, टूटा हुआ है सपना,
ऐ संग मरने वाले, एक खून क्यूँ किया है।
ये भूल थी मेरी कुछ, या भूल ही किया है।

थी हमने की मुहब्बत, ली हमने अब सजा है,
प्यार की ये फितरत, तेरी तो हमनवा है,
एक पल को ही सही पर, तू दर्द की दवा है,
क्या खूब वो खुदा है, जो तेरा ही गवाह है,
दर्द का ये मंजर, थाम हमने अब लिया है।
ये भूल थी मेरी कुछ, या भूल ही किया है।
        (सर्वाधिकार सुरक्षित)
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या।
दिनाँक:- १२/१२/२०१४

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