बुधवार, 11 दिसंबर 2019

जय श्री राधे

#राधा जी ने #कृष्ण जी से प्रेम किया या फिर यूँ कहें कि कृष्ण जी ने श्री राधा जी से प्रेम किया, दोनों ही बातें परस्पर समान्तर हैं।

पूरा #संसार जानता था कि राधा जी श्री कृष्ण के नाम पर बैठी हैं, इसलिए किसी और से #विवाह नहीं कर रही हैं।
यदि कृष्ण ने उनसे #शादी नहीं की तो राधा जी भी कृष्ण जी के पास नहीं गयी, राधा जी भी #नारी जाति को प्रेम में नीचा अथवा नारी के प्रेम को #झूठा नहीं बताना चाहती थीं।
#परिणाम स्वरूप राधा जी और श्री कृष्ण का प्रेम अमर हो गया।
श्री कृष्ण ने भी कभी राधा जी से प्रेम करने की बात को अस्वीकार नहीं किया।
श्री कृष्ण जी सक्षम थे कि वो राधा जी से विवाह कर लेते। राधा जी भी #सुंदर और गुणातीत थी वो भी किसी और से विवाह कर सकती थी।
किन्तु फिर ये सन्देश कौन देता कि, प्रेम सच्चा और अमर होता है। #नारियाँ उसी से प्रेम करें और वैसा ही प्रेम करें जिसे #छुपाना न पड़े। और यदि प्रेम किसी और से और विवाह किसी और से होने लगेगा तो संसार में #वर्ण_शंकर संतानों का जन्म होने लगेगा, और सुखी संसार भी #नर्क जैसा हो जाएगा।

यदि आप #राधा_कृष्ण को मानते हैं और उनमें विश्वास रखते हैं तो आप उनके संदेशों का पालन करें यही उनकी भक्ति होगी।

जो मनचले अपने आप को कृष्ण जैसा समझ कर झूठे संदेशो के साथ प्रेम के नाम पर अवैध सम्बन्ध बनाकर अपनी हवस बुझाने का प्रयास करते हैं तो मैं उनसे ये कहता हूँ कि #हवस कभी बुझती नहीं है वो बढ़ जाती है।
फिर भी यदि कृष्ण बनने का ढोंग करना चाहते हैं तो कृष्ण जी ने एक उंगली पर पूरा #गोवर्धन पर्वत उठा लिया था, आप एक 50किलो का #पत्थर ही उठा कर अपनी #तुलना कर सकते हैं।

जो मनचलियाँ अपने आप को राधा बताना चाहती हैं तो राधा जी ने कृष्ण के नाम पर पूरा जीवन बिता दिया , और आप जीवन केवल अपने कृष्ण का नाम अपने नाम के आगे अथवा पीछे लिखना शुरू कर लें नहीं तो आपके साथ धोखा हो जाएगा ! जिसकी आशंका श्री कृष्ण और राधा जी को पहले से ही थी और उन्होंने इसे दूर करने का प्रयत्न किया है।

यदि आपके मन में कोई प्रश्न हो तो अवश्य पूछें हम आपकी दुविधा दूर कर देंगे।

जय श्री कृष्ण ! 
भारतीय शुभचिंतक : अंगिरा प्रसाद मौर्य